पार्वती मंगल: गोस्वामी तुलसीदास रचित दिव्य काव्य, कथा, महत्व और संपूर्ण जानकारी
पार्वती मंगल: माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य विवाह का अमर काव्य सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के संतुलन और शक्ति तथा शिव के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इसी दिव्य प्रसंग का अत्यंत सुंदर और भक्तिमय वर्णन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित "पार्वती मंगल" में मिलता है। यह काव्य भगवान शिव की अलौकिक महिमा, माता पार्वती की कठोर तपस्या, हिमवान और मैना की भावनाओं तथा शिव-पार्वती विवाह के मंगलमय प्रसंगों का अत्यंत मनोहारी चित्रण करता है। आज भी अनेक भक्त शुभ अवसरों, विवाह समारोहों और धार्मिक आयोजनों में पार्वती मंगल का पाठ करते हैं। पार्वती मंगल क्या है? पार्वती मंगल गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध खंडकाव्य है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है यह काव्य केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि भक्ति, आदर्श, त्याग, तपस्या और दिव्य प्रेम का अनुपम उदाहरण है। इसमें शिव-पार्वती विवाह के प्रत्येक प्रसंग को सरल भाषा और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया है। पार्वती मंगल के...