कनकधारा स्तोत्र: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ, महत्त्व और पाठ विधि | Kanakdhara Stotra in Hindi
कनकधारा स्तोत्र का महत्व, कथा, सम्पूर्ण जानकारी और पाठ करने की सही विधि कनकधारा स्तोत्र क्या है? कनकधारा स्तोत्र माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए रचित एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी स्तोत्र है। यह स्तोत्र महान दार्शनिक और संत आदि शंकराचार्य द्वारा रचा गया था। मान्यता है कि इस स्तोत्र के पाठ से दरिद्रता दूर होती है, धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। “कनकधारा” शब्द दो भागों से मिलकर बना है — कनक अर्थात सोना और धारा अर्थात वर्षा। अर्थात ऐसा स्तोत्र जिससे स्वर्ण वर्षा हो — यह प्रतीक है लक्ष्मी कृपा और समृद्धि का। कनकधारा स्तोत्र की पौराणिक कथा कथा के अनुसार, एक बार बालक शंकराचार्य भिक्षा मांगते हुए एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण महिला के घर पहुँचे। उस महिला के पास देने के लिए कुछ भी नहीं था, केवल एक आंवला फल था। उसने श्रद्धा से वही आंवला दान कर दिया। उसकी भक्ति और त्याग से भावुक होकर आदि शंकराचार्य ने वहीं बैठकर माँ लक्ष्मी की स्तुति में कनकधारा स्तोत्र की रचना की। कहा जाता है कि माँ लक्ष्मी प्रसन्न हुईं और उस घर पर स्वर्ण की वर्षा कर दी। तभी स...